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Ramesh Jhorar

भीड़ से निकल ये सोचकर कि तूं है सबसे अलग, सबसे जुदा, उनको बता जो है तुझसे खफा, कि जीने का मतलब होता है क्या

दिल में कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो तो मनुष्य के हर पौध का बरगद बना देने का जज्बा अपने आप पैदा हो जाता है।

मन में सच्ची लगन हो तो काई भी कार्य कठिन नहीं होता और फिर समाज सेवा का जज्बा मन में हो तो फिर कहनाह ही क्या। यूं तो सभी समाज सेवा में अपना योगदान देते हैं, परन्तु ध्रुव तारे की चमक सबसे अलग होती है। जिन्दगी में जीने का एक अंदाज एक अलग फलसफा लेकर आये बहुमुखी प्रतिभा, सौम्य स समर्पित रमेश झोरड़ का जन्म पिचकराई गाँव में सांस्कृतिक विचार एवं धार्मिक आस्था रखने वाले एक प्रतिष्ठित किसान परिवार में हुआ। आपको सेवाभावी सुसंस्कार अपने दादा श्री ख्यालीराम जी झोरड़ से प्रात्त हुए। उनके अच्छे सुसंस्कारों के कारण ही समाज सेवा के क्षेत्र में कुछ कर गुजरने की तम्मना लिए हुए थे। पढाई के दौरान भी स्कूल गांव व शहर की प्रत्येक सामाजिक कार्यो में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते रहे। सुसंस्कारों की अमरबेल पर बढता बचपन लेकर दिन हो या रात समाज सेवा के कार्य में आपने तन-मन से किया। समाज सेवा के पुनीत कार्यो में आज भी आप दिल खोल कर सेवाभाव से तत्लीन है। सहयोग, शिक्षा एवं समाज सेवा के संघर्ष में आपने कभी निजी जिन्दगी को आड़ नहीं आने दिया। जिन्दगी में विपरीत परिस्थितियों में हमेशा आपने परिस्थतियों पर विजय पाई है व हमेशा लीक व परम्परा से हटकर कुछ करने का प्रयास किया है। आपका मानना है कि इंसान की योग्यता की सही पहचान प्रतिकुल समय में ही होती है। इसलिए आप हमेशा कहते है कि नदी के बहाव के साथ तो लाशे भी तैर जाती है। इंसान वही है जो बहाव को चीन कर नदी पार करे। लेकिन नाम व यश की चाह न रख केवल पीडि़त मानव की सेवा भावना दिलों दिमाग में रखने वाले रमेश झोरड़ के सभी कार्य प्रशंसनीय ही नहीं अपितु सराहनीय भी है। समाज सेवा से बढ़कर कोई मानव धर्म नहीं होता रमेश अपने मानव धर्म का पूरी तरह निर्वाह कर रहे है। क्षैत्र के गरीब व असहाय वर्ग की दुआऐं उनके साथ है कि व समाज सेवा के क्षैत्र में नये सौपान तय करते जाए। पीडि़त व असहाय मानव रहित समाज का सपना देखने वाले रमेश अपना सर्वत्व समाज सेवा में लगाने की चाहत रखते है। आपके जिन्दगी जीने के अन्दाज ने हर एक को प्रभावित किया है। आप में सबसे बड़ी विशेषता यह की विशेष स्नेही व विश्वास से आप सभी के चहेते बन गये है। बस शब्दों के माध्यम से केवल इतना ही कहना चाहते है। साथ चलने का इरादा जब जवां हो जायेगा, आदमी आदमी से मिलकर कारवां हो जायेगा। तु भी रख किसी के पांव के नीचे थोड़ी सी जमीन। तु भी किसी के नजरों में आसमां हो जाएगा।

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ramesh jhora nohar